गंगा का बढ़ता जलस्तर तटवर्ती वाशिंदों के लिए बना आफत

गंगा का बढ़ता जलस्तर तटवर्ती वाशिंदों के लिए बना आफत
मातृभूमि की पुकार (ब्यूरो रिपोर्ट खेतल सिंह यादव)
फर्रुखाबाद/शमसाबाद, 3 अगस्त 2026।
गंगा नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर ने फर्रुखाबाद जनपद के शमसाबाद क्षेत्र में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। ढाई घाट–जलालाबाद शमसाबाद स्टेट हाईवे पर पर बाढ़ का पानी भर जाने से यातायात तरह प्रभावित हो रहा है। सड़क पर कई फीट तक पानी बहने के कारण छोटे-बड़े वाहनों का आवागमन बाधित होने लगा है। स्थानीय लोगों को दैनिक कार्यों, बाजार, अस्पताल तथा विद्यालयों तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।बताया जा रहा है कि गंगा नदी में लगातार पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसके चलते नदी का पानी तटवर्ती क्षेत्रों में फैल गया है और कई गांवों तक पहुंच चुका है। बाढ़ का पानी खेतों में घुसने से किसानों की धान, मक्का, बाजरा, सब्जियों सहित अन्य फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं उतरा तो उनकी अधिकांश फसलें नष्ट हो सकती हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।बाढ़ का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों के सामने भी गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। चारागाह और खेतों में पानी भर जाने के कारण मवेशियों के लिए हरे चारे की भारी कमी हो गई है। पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना भी लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है। कई परिवार अपने पशुओं को ऊंचे स्थानों पर बांधने के लिए मजबूर हैं।ढाई घाट–जलालाबाद शमसाबाद स्टेट हाईवे पर जलभराव होने से राहगीरों और वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। कई दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए, जबकि भारी वाहन भी सावधानी के साथ निकलते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो मार्ग पूरी तरह बंद होने की आशंका है, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट सकता है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए, किसानों की फसल क्षति का आकलन कर शीघ्र मुआवजा दिया जाए तथा पशुओं के लिए चारे और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था कराई जाए। साथ ही जलभराव वाले स्थानों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।प्रशासन की ओर से बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। संबंधित विभागों की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं और लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने, अनावश्यक यात्रा न करने तथा प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। यदि गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की आवश्यकता और बढ़ जाएगी।






