औद्योगिक गलियारा परियोजना के लिए प्रस्तावित 4,500 हेक्टेयर बहुफसली, सिंचित, अत्यंत उपजाऊ एवं बाग-बगीचों वाली कृषि भूमि के अधिग्रहण प्रस्ताव के विरोध में आज प्रभावित ग्रामों के हजारों किसानों ने किसान आंदोलन !

ब्यूरो चीफ फर्रुखाबाद……
संजीव कुमार प्रजापति
औद्योगिक गलियारा परियोजना के लिए प्रस्तावित 4,500 हेक्टेयर बहुफसली, सिंचित, अत्यंत उपजाऊ एवं बाग-बगीचों वाली कृषि भूमि के अधिग्रहण प्रस्ताव के विरोध में आज प्रभावित ग्रामों के हजारों किसानों ने किसान आंदोलन !

जनपद फर्रुखाबाद में औद्योगिक गलियारा परियोजना के लिए प्रस्तावित 4,500 हेक्टेयर बहुफसली, सिंचित, अत्यंत उपजाऊ एवं बाग-बगीचों वाली कृषि भूमि के अधिग्रहण प्रस्ताव के विरोध में आज प्रभावित ग्रामों के हजारों किसानों ने किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष अजय अनमोल के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट, फतेहगढ़ स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पर शांतिपूर्ण धरना -प्रदर्शन किया।

किसानों का कहना है कि यूपीडा (UPIDA) की औद्योगिक गलियारा परियोजना के नाम पर बहुफसली एवं अत्यंत उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव किसानों के हितों, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के विपरीत है। किसानों ने कहा कि जिस भूमि पर आलू, धान, गेहूँ, मक्का, सब्जियों तथा विभिन्न फलदार बागों का उत्पादन होता है, उसके अधिग्रहण से हजारों किसान परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

धरने के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी, फर्रुखाबाद को ज्ञापन सौंपकर 4,500 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण प्रस्ताव को तत्काल निरस्त करने की मांग की।

किसानों की प्रमुख मांगों में औद्योगिक गलियारा परियोजना के लिए असिंचित, बंजर, अनुपजाऊ अथवा कम उपजाऊ भूमि का चयन करना, उपजाऊ भूमि को मनमाने ढंग से चिन्हित करने वाले अधिकारियों की उच्चस्तरीय जांच कराकर कार्रवाई करना, भूमि अर्जन अधिनियम, 2013 की धारा 24(2) को किसानों के हित में पुनः प्रभावी किए जाने की मांग तथा वर्ष 2015 के शासनादेश की आड़ में किसानों पर दबाव बनाकर सीधे बैनामा कराने की व्यवस्था समाप्त करना शामिल है।
किसान आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष अजय अनमोल ने कहा कि विकास के नाम पर किसानों की बहुफसली और उपजाऊ भूमि को नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। औद्योगिक परियोजनाओं के लिए बंजर एवं कम उपजाऊ भूमि का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि विकास के साथ-साथ किसानों की आजीविका, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण भी सुरक्षित रह सके।
उन्होंने कहा कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो किसान अपने लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकारों के तहत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बताए अहिंसात्मक मार्ग पर व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
धरना-प्रदर्शन में प्रमुख रूप से शामिल रहे
प्रदेश प्रभारी अशोक कटियार, जिला प्रवक्ता देवेश चतुर्वेदी, कानपुर मंडल महासचिव सुधीर गंगवार, जिला प्रभारी वी.के. गंगवार, जिलाध्यक्ष राजीव यादव ‘लालू’, अरविन्द राजपूत, वैद्य वीरेन्द्र आर्य, युवा नेता हर्ष गंगवार, मृदुल गंगवार, अभिनन्दन गंगवार, प्रधान प्रमोद गंगवार, राजीव कठेरिया, प्रधान देवेन्द्र यादव, पूर्व प्रधान प्रभाकर पाण्डेय, संतोष यादव, संजू यादव, रविन्द्र राठौर, सुजीत कुमार, श्यामवीर राजपूत, रामनिवास शाक्य, राम किशोर, पूर्व प्रधान रमेश पाल, अजय पाल, नीरज पाल, सुनील पाल, विकास पाठक सहित बड़ी संख्या में किसान आंदोलन के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं प्रभावित किसान शामिल रहे।




