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फर्रुखाबाद न्यायाधीश शैलेंद्र सचान की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नौ आरोपियों को दोषी ठहराया ,लूट और पुलिस पर हमला, मुख्य आरोपी को 5 साल, 8 अन्य को 2-2 साल कारावास ।

फर्रुखाबाद न्यायाधीश शैलेंद्र सचान की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नौ आरोपियों को दोषी ठहराया ,लूट और पुलिस पर हमला, मुख्य आरोपी को 5 साल, 8 अन्य को 2-2 साल कारावास ।

 

ब्यूरो चीफ संजीव कुमार प्रजापति

फर्रुखाबाद में विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र/तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नौ आरोपियों को दोषी ठहराया है। मुख्य आरोपी छोटे जाटव को लूट और चोरी का माल बरामद होने के मामले में पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई है। वहीं, आठ अन्य आरोपियों को पुलिस कार्य में बाधा डालने, मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप में दोषी सिद्ध कर दंडित किया गया है।

यह घटना 4 नवंबर 2002 की रात करीब 7:45 बजे की है। गांव ढिलावल के पास आम के बाग के सामने राजेश जाटव, निहाल सिंह और बादाम सिंह साइकिल से अपने गांव लौट रहे थे। रास्ते में कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें रोका और लाठी-डंडों से मारपीट की। इस दौरान राजेश जाटव से 150 रुपये लूट लिए गए।

लूटे गए 150 रुपये बरामद
शोर सुनकर गश्त कर रही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने पीछा कर मुख्य आरोपी छोटे जाटव को पकड़ लिया। उसकी तलाशी लेने पर लूटे गए 150 रुपये बरामद हुए। छोटे जाटव की गिरफ्तारी के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण ट्रैक्टरों से घटनास्थल पर पहुंच गए और आरोपी को छुड़ाने का प्रयास करते हुए पुलिस टीम पर हमला कर दिया।

पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने मौके से कई लोगों को गिरफ्तार किया था।

विभिन्न गवाहों के बयान

सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने पुलिस कर्मियों सहित विभिन्न गवाहों के बयान अदालत में पेश किए। बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए दलील दी कि सभी आरोपी गरीब मजदूर हैं और लंबे समय से मुकदमे का सामना कर रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।

अदालत ने छोटे जाटव को लूट के आरोप में पांच वर्ष के कारावास के साथ दो हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। वहीं, निहाल सिंह, रघुवीर, नवरतन, जितेंद्र, गिरीश, दुर्गेश, सत्यवीर और सुधीर को सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस से मारपीट और धमकी देने के मामले में दो-दो वर्ष की सजा और प्रत्येक पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

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