खाद्य सुरक्षा विभाग का नमूना अभियान: हर साल सैंपल, लेकिन कार्रवाई का इंतजार

खाद्य सुरक्षा विभाग का नमूना अभियान: हर साल सैंपल, लेकिन कार्रवाई का इंतजार
पिछले वर्ष कीड़ों वाला आटा मिलने का मामला आज भी चर्चा में, जनता पूछ रही—आखिर कार्रवाई कहाँ तक पहुँची?
मातृभूमि की पुकार (संवाददाता)

शाहजहाँपुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने बुधवार को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में नमूना संग्रह अभियान चलाते हुए आटा, रवा, मैदा, ओनियन पाउडर और रस्क सहित कुल पाँच खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए एकत्र किए। विभाग का कहना है कि अभियान आयुक्त के निर्देश तथा जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के आदेश पर चलाया गया।सहायक आयुक्त (ग्रेड-2) के नेतृत्व में टीम ने सबसे पहले जमौर स्थित विनायक फ्लोर मिल का निरीक्षण किया, जहाँ से आटा, रवा और मैदा के तीन नमूने लिए गए। निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई एवं रखरखाव में कुछ कमियाँ मिलने पर संचालक को सुधार नोटिस जारी किया गया।यह वही फ्लोर मिल है, जहाँ पिछले वर्ष पैक आटे में कथित रूप से कीड़े मिलने के मामले ने सुर्खियाँ बटोरी थीं। उस समय खाद्य सुरक्षा विभाग ने छापेमारी कर कई पैकेट जब्त किए थे और आवश्यक कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि उस मामले में अंतिम कार्रवाई क्या हुई, इसका स्पष्ट विवरण अब तक सार्वजनिक नहीं हो सका है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि उस प्रकरण का अंतिम परिणाम क्या रहा।इसके बाद टीम ने कटरा रोड (खुदागंज) स्थित लक्ष्मी नारायण ट्रेडर्स से आटे का एक नमूना लिया। तिलहर के बहादुरगंज स्थित शिव भोज आटा इकाई का निरीक्षण कर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए। वहीं निगोही रोड (बलेली) स्थित ए.आई. फूड इंडस्ट्रीज से ओनियन पाउडर और रस्क के दो नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए।विभाग के अनुसार निरीक्षण के दौरान कोई अपमिश्रित अथवा अखाद्य खाद्य पदार्थ मौके पर नहीं मिला। सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है और रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।अभियान में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुभाष तिवारी के साथ खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनय कुमार यादव, मानचंद कुमार, वरुण कुमार, सौरम सोनी, अजीत कुमार, मनोज कुमार तथा डॉ. विवेक कुमार वर्मा शामिल रहे।
जनता के सवाल बरकरार
जनपद में समय-समय पर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं, लेकिन आम लोगों का कहना है कि अधिकांश मामलों में जांच रिपोर्ट और उसके बाद की कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ पाती। लोगों का मानना है कि यदि जांच में किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित कार्रवाई और उसका परिणाम भी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि ऐसे अभियानों पर जनता का भरोसा और मजबूत हो सके।






