समाज बदलेगा तो बेटियां और महिलाएं होंगी अधिक सुरक्षित: डीएम

समाज बदलेगा तो बेटियां और महिलाएं होंगी अधिक सुरक्षित: डीएम


मातृभूमि की पुकार संवाददाता
शाहजहांपुर 23 जुलाई। गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित बिस्मिल सभागार में मिशन शक्ति के तहत संवाद का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह, विशेष अतिथि के रूप में एसपी सौरभ दीक्षित, विशिष्ट अतिथि के रूप में सीडीओ उत्कर्ष द्विवेदी, नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी और एडीएम प्रशासन रजनीश कुमार मिश्र मौजूद थे।
डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं और बेटियों के प्रति सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का संदेश देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उत्तर प्रदेश सरकार का ‘मिशन शक्ति’ अभियान महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
मुझे प्रसन्नता है कि समाचार पत्र इस सामाजिक अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का दायित्व निभाया है। मीडिया केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त मंच भी है। जब प्रशासन, मीडिया और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तब जागरूकता का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। मिशन शक्ति से जुड़कर प्रशासन के कार्यों में सहयोग करने वाली 18 महिलाओं को सम्मानित किया गया, जो कहीं न कहीं समाज में बेटियों के लिए, महिलाओं के लिए काम कर रहीं हैं। इनका अधिकारियों ने उत्साहवर्धन किया। डीएम ने कहा कि आप लोगों के माध्यम से अधिक लोगों तक हम सरकार की योजनाएं पहुंच पाती हैं। उनके कार्यों को जनपद के लिए सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान से हमारा मनोबल बढ़ता है। ऐसा लगता है कि हमारे कार्यों को कहीं न कहीं नोटिस किया जा रहा है, जिसके एवज में हमें यह सम्मान मिल रहा है। डीएम ने कहा कि ऐसा नहीं है, अखबारों और सोशल मीडिया के माध्यम से हम आपके हर कार्यों को देख रहे हैं। संवाद के दौरान महिलाओं ने भी अपने विचार रखे। प्रशासन से सहयोग और हर तरह से उनके साथ मिलकर काम करने पर बल दिया।मिशन शक्ति कार्यक्रम में महिला सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली विभिन्न विभागों की अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और सामाजिक संस्थाओं से जुड़ी महिलाओं को सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में डॉ. संगीता मोहन (संस्थापक, समर्पण संस्था), अमृता दीक्षित (जिला मिशन को-ऑर्डिनेटर, महिला कल्याण विभाग), नमिता यादव (प्रबंधक, वन स्टॉप सेंटर), श्वेता सक्सेना (प्रतिनिधि, भोर फाउंडेशन), नमिता सिंह (सदस्य, रानी लक्ष्मी विंग), नेहा सक्सेना (निदेशक, मातृत्व सोशल वेलफेयर सोसाइटी), अल्पना श्रीवास्तव (समाजसेवी), ललिता यादव (अध्यक्ष, इंटरनेशनल लायंस क्लब शक्ति), वर्षा गोस्वामी (जिला प्रभारी, वीआईपी ग्रुप), डॉ. मधुर कश्यप, नीतू गुप्ता (जिलाध्यक्ष, वीआईपी ग्रुप), महिमा शुक्ला (पूर्व अध्यक्ष, लायंस क्लब सहेली), रश्मि अग्निहोत्री (प्रभारी निरीक्षक, महिला थाना), नीतू मलिक (महिला आरक्षी, थाना सदर बाजार), राजेंद्री (महिला आरक्षी, कोतवाली), जूली चौधरी (महिला आरक्षी, थाना पुवायां), साधना वाजपेयी (जन शिकायत प्रकोष्ठ) तथा डोली चौहान (महिला आरक्षी, थाना जलालाबाद) शामिल रहीं। सम्मान मिलने पर सभी के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए आगे भी सक्रिय रूप से कार्य करने का संकल्प जताया।
मिशन शक्ति कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित ने कहा कि वर्ष 2019 में हाथरस की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मिशन शक्ति अभियान की शुरुआत की थी। वर्तमान में इसका पांचवां चरण चल रहा है और पिछले सात वर्षों में इस अभियान ने महिला सुरक्षा और जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव लाया है।
उन्होंने कहा कि मिशन शक्ति के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने पुलिस के साथ मिलकर महिलाओं और बालिकाओं तक सहायता पहुंचाने का काम किया है। इससे पुलिस की कार्यशैली में भी सकारात्मक बदलाव आया है और लोगों के बीच पुलिस की संवेदनशील एवं सहयोगी छवि मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती होने से महिलाओं से जुड़े मामलों के निस्तारण में और अधिक प्रभावशीलता आई है। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों से कहा कि यह सम्मान उनके कार्यों की पहचान है। अब उन्हें और अधिक समर्पण के साथ काम कर विभाग की छवि को मजबूत करना होगा। उन्होंने घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक समस्याओं की रोकथाम के लिए समाजसेवी संगठनों और नागरिकों से पुलिस का सहयोग करने की अपील की। साथ ही महिला आरक्षियों से कहा कि जो लोग बेहतर कार्य कर रहे हैं, उनसे सीख लेकर अपनी कार्यशैली को और प्रभावी बनाएं।मिशन शक्ति कार्यक्रम में नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी ने कहा कि किसी भी सरकारी योजना की सफलता जनभागीदारी पर निर्भर करती है। यदि समाज का सहयोग नहीं मिलेगा तो योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाएगा। इसलिए मिशन शक्ति अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं और जागरूक नागरिकों की सक्रिय भूमिका जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आज भी समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो जागरूकता और संसाधनों के अभाव में पीछे रह गया है। ऐसे लोगों तक पहुंचने के लिए महिलाओं, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं को आगे आना होगा। सरकार महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए लगातार विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन इन योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब समाज भी इसमें बराबर की भागीदारी निभाए।
नगर आयुक्त ने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने मिशन शक्ति अभियान से जुड़े सभी लोगों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जुड़ना चाहिए।मिशन शक्ति कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी ने 14 से 15 वर्ष से कम आयु की बालिकाओं को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान में जनसहभागिता बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह बीमारी समय पर टीका लगवाकर काफी हद तक रोकी जा सकती है। इसलिए समाज के सभी लोगों को इस अभियान में सहयोग करना चाहिए।
सीडीओ ने उपस्थित लोगों से कहा कि वे अपने आसपास की पात्र बालिकाओं की पहचान कर उन्हें टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। इस दौरान जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 40 से 45 बालिकाओं का समूह तैयार करता है तो प्रशासन विशेष शिविर लगाकर उनके टीकाकरण की व्यवस्था करेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर इस अभियान को गति देगा, ताकि अधिक से अधिक बालिकाएं इसका लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम में उड़ान संस्था की डॉ. संगीता मोहन ने बताया कि उनके पास 55 बालिकाओं का ऐसा समूह तैयार है, जिनके अभिभावकों ने टीकाकरण के लिए सहमति दे दी है। इस पर जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग से समन्वय कर शीघ्र ही उनके लिए टीकाकरण शिविर आयोजित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनसहयोग से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है और बालिकाओं को गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकता है।






