उत्तर प्रदेशफर्रुखाबाद

लेखपाल-कानूनगो ने मौके पर पहुंचकर जलमग्न फसलों का किया सर्वे, 22 बीघा धान की फसल बर्बाद। 

मुख्यमंत्री एप पर शिकायत के बाद जागा प्रशासन

लेखपाल-कानूनगो ने मौके पर पहुंचकर जलमग्न फसलों का किया सर्वे, 22 बीघा धान की फसल बर्बाद। 

शमशाबाद, फर्रुखाबाद। 6 अक्टूबर। मातृभूमि की पुकार संवाददाता।

विनाशकारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। लगातार हुई बारिश के चलते क्षेत्र में धान, गन्ना सहित कई फसलें जलमग्न होकर बर्बाद हो गईं। वहीं अनेक गरीब परिवारों के कच्चे मकान भी बारिश की भेंट चढ़ गए। घर गिरने के बाद कई परिवार आज भी खुले आसमान के नीचे जीवन गुजारने को मजबूर हैं।

इसी क्रम में थाना शमशाबाद क्षेत्र के ग्राम रजला मई निवासी किसान आशीष कुमार गंगवार की करीब 22 बीघा धान की फसल भी बारिश के पानी में डूबकर बर्बाद हो गई। किसान ने फसल नुकसान का सर्वे कराकर नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग को लेकर उपजिलाधिकारी कायमगंज को प्रार्थना पत्र दिया था।

किसान का आरोप था कि अधिकारियों के निर्देश के बावजूद क्षेत्रीय लेखपाल ने मौके पर पहुंचने के बजाय गांव में ही सर्वे की प्रक्रिया पूरी कर दी। किसान के अनुसार सर्वे कब किया गया, इसकी जानकारी भी ग्रामीणों को नहीं हो सकी। इससे किसानों में नाराजगी बनी हुई थी।

मामले को लेकर किसान आशीष कुमार गंगवार ने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत करने के साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर शिकायत दर्ज कर दोबारा मौके पर सर्वे कराए जाने की मांग की।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने क्षेत्रीय लेखपाल को मौके पर जाकर फसल नुकसान का वास्तविक सर्वे करने के निर्देश दिए। मंगलवार को क्षेत्रीय लेखपाल अनिल कुमार शर्मा एवं कानूनगो कुतुबुद्दीन गांव पहुंचे और किसानों की मौजूदगी में मौके पर जाकर जलमग्न फसलों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान खेतों में पानी भरा मिला और फसलें जलमग्न पाई गईं। अधिकारियों ने किसानों से फसल नुकसान की जानकारी भी ली। मौके पर मौजूद किसानों ने प्रशासन से नुकसान का उचित आकलन कर शीघ्र आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग की।

क्षेत्रीय लेखपाल एवं कानूनगो ने बताया कि मौके पर किए गए सर्वे की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

किसानों को मुआवजे की आस

मौके पर दोबारा हुए सर्वे के बाद किसानों को उम्मीद जगी है कि प्रशासन द्वारा वास्तविक नुकसान का आकलन कर शासन की ओर से निर्धारित नियमों के अनुसार उन्हें फसल क्षति का मुआवजा एवं सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button